असम की हिलिखा (हरीतकी) के 7 चमत्कारी फायदे, उपयोग और खेती||assam, hilikha, haritaki

 असम की हरीतकी (हिलिखा) - फायदे, उपयोग और खेती की पूरी जानकारी




असम की हरीतकी क्या है?

असम में जिसे हम हिलिखा कहते हैं, आयुर्वेद में उसी को हरीतकी या हरड़ कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम टर्मिनेलिया चेबुला है। 



आयुर्वेद में इसे सभी औषधियों में श्रेष्ठ माना गया है। तिब्बत में इसे "औषधियों का राजा" कहा जाता है। यह प्रसिद्ध आयुर्वेदिक चूर्ण त्रिफला का एक मुख्य भाग है। त्रिफला तीन फलों से बनता है - आंवला, बहेड़ा और हरीतकी।

Haritaki farming 5. Hilikha ki kheti 6. Harad ke fayde 7. Triphala Haritaki 8. Hilikha price in Assam

असम के जंगलों में यह प्राकृतिक रूप से बहुतायत में पाया जाता है, खासकर चिरांग, कोकराझार, ग्वालपाड़ा, बोंगाईगांव और काजीरंगा के आसपास के इलाकों में।













इसके अलग-अलग नाम

संस्कृत में - 

अभया, हरीतकी, पथ्या • असमिया में - हिलिखा • हिंदी में - हरड़, हरीतकी • अंग्रेजी में - ब्लैक मायरोबलान 


हरीतकी के 7 चमत्कारी फायदे

1. पेट के लिए अमृत: यह कब्ज, गैस और अपच के लिए सबसे अच्छी औषधि मानी जाती है। यह पाचन तंत्र को साफ करती है।

2. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए: इसमें भरपूर एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं।

3. मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल में लाभकारी: यह खून में शर्करा और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करती है।

4. मुंह और मसूड़ों के लिए: इसके पानी से कुल्ला करने से मसूड़ों से खून आना बंद होता है और मुंह की दुर्गंध दूर होती है।

5. वजन कम करने में सहायक: त्रिफला के रूप में यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करती है।

6. त्वचा और बालों के लिए: इसके चूर्ण का लेप त्वचा के रोगों में और बालों का झड़ना रोकने में उपयोगी है।

7. याददाश्त के लिए: नए शोध के अनुसार यह दिमाग को तेज करने और याददाश्त बढ़ाने में भी मदद करती है।



उपयोग कैसे करें?

चूर्ण के रूप में: 3 से 5 ग्राम हिलिखा चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ रात में सोने से पहले लें।

त्रिफला के रूप में: एक चम्मच त्रिफला चूर्ण रात में गुनगुने पानी से लें।

कुल्ला करने के लिए: हिलिखा को पानी में उबालकर उस पानी को ठंडा करके कुल्ला करें।

ध्यान दें: गर्भवती महिलाएं और बहुत कमजोर व्यक्ति वैद्य की सलाह के बिना इसका सेवन न करें।


असम में इसकी खेती और कमाई

असम की जलवायु इसकी खेती के लिए बहुत ही अनुकूल है। असम सरकार भी औषधीय पौधों को लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।


पेड़: यह 20 से 30 मीटर ऊंचा बड़ा पेड़ होता है।

फल आने का समय: नवंबर से मार्च तक इसके फल पकते हैं।

बाजार भाव: स्थानीय बाजार में इसका सूखा फल 40 से 80 रुपये प्रति किलो बिकता है। वहीं आयुर्वेदिक कंपनियों और ऑनलाइन बाजार में इसका दाम 200 से 300 रुपये प्रति किलो तक चला जाता है।

कम लागत में ज्यादा मुनाफा: एक बार पेड़ लग जाने के बाद यह 30 से 40 साल तक फल देता रहता है। बिजनी और आसपास के किसान इसे सुपारी के बागान के किनारे लगाते हैं और इससे अतिरिक्त आय प्राप्त करते हैं।


निष्कर्ष


असम की हिलिखा सिर्फ एक जंगली फल नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेद का एक अनमोल खजाना है। अगर आप किसान हैं तो इसके एक-दो पेड़ जरूर लगाएं, और अगर आप स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं तो इसे अपने घर में जरूर रखें।




टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Manimuni Saag Ke Fayde - Assam Ki Chamatkari Jadi Buti | मानिमुनी के फायदे

Bhringraj Kya Hai? Bhringraj Ke Fayde, Nuksan Aur Tel Banane Ki Vidhi||bhringraj balon ka raja